मुझे लगता है की हम सब ना घर की तलाश में है। ऐसा घर जहां छत तो होगी मगर दीवारें नहीं होंगी। और ये घर की तलाश ही है जो हमें नए-नए शहर घूमने पर मजबूर करती है।हम भटकते हैं, कभी गलियों में, कभी बाजारों में, बस इस उम्मीद में की कहीं कोई घर खाली मिल जाए। कई जगह हमें बहुत अपनापन मिलता है, कई गलियां है जो बहुत अपनी लगती हैं। इन गलियों में भटकना किसी सुहाने सफर जैसा लगता है। हर सफर के बाद हम इन गलियों में अपने दिल का कुछ हिस्सा छोड़ते चलते हैं, और लिए चलते हैं अपने साथ इन गलियों की फोटो जो की हम घर मिलने के बाद दीवारों पर टांग सकेंगे।
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